मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब क्रिप्टोकरेंसी भारत में 'प्रॉपर्टी' की तरह होगी मान्यBitcoin inBharat | अपडेट: अप्रैल 2026भारतीय क्रिप्टो निवेशकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर आई है। मद्रास हाईकोर्ट ने एक लैंडमार्क जजमेंट में क्रिप्टोकरेंसी को भारतीय कानून के तहत 'प्रॉपर्टी' (संपत्ति) माना है। इस फैसले से क्रिप्टो को अब कानूनी रूप से स्वामित्व, भोग और ट्रस्ट में रखने योग्य संपत्ति का दर्जा मिल गया है।
फैसले की मुख्य बातें:
मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश की सिंगल बेंच ने कहा: “क्रिप्टोकरेंसी प्रॉपर्टी है। यह न तो टैंगिबल (ठोस) प्रॉपर्टी है और न ही करेंसी। लेकिन यह ऐसी प्रॉपर्टी है जिसका भोग (enjoy) और कब्जा (possess) किया जा सकता है। इसे ट्रस्ट में भी रखा जा सकता है।”
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों (Ahmed G.H. Ariff vs CWT और Jilubhai Nanbhai Khachar vs State of Gujarat) का हवाला देते हुए 'प्रॉपर्टी' की व्यापक परिभाषा को लागू किया।
क्रिप्टोकरेंसी को Income Tax Act, 1961 की धारा 2(47A) के तहत Virtual Digital Asset (VDA) माना जाता है। इसे स्पेकुलेटिव ट्रांजेक्शन नहीं समझा जाएगा।
केस क्या था?
यह फैसला WazirX हैक (2024) से जुड़े एक केस में आया। एक निवेशक (Rhutikumari) ने अपनी 3,532.30 XRP टोकन्स को रिलीज करने की मांग की थी, जो हैक के बाद फ्रीज हो गए थे। कोर्ट ने निवेशक की होल्डिंग को उनकी प्रॉपर्टी माना और एक्सचेंज को इसे छेड़छाड़ करने से रोका। एक्सचेंज पर फिड्यूशरी (ट्रस्टी) की जिम्मेदारी तय की गई।इस फैसले का महत्वकानूनी स्पष्टता: अब क्रिप्टो को इनहेरिटेंस, इंसॉल्वेंसी, टैक्सेशन और कॉन्ट्रैक्ट के मामलों में प्रॉपर्टी की तरह ट्रीट किया जा सकेगा।
ग्लोबल तालमेल: यह फैसला UK, Singapore, New Zealand और US जैसे देशों के फैसलों के अनुरूप है, जहां क्रिप्टो को intangible property माना गया है।
निवेशक सुरक्षा: एक्सचेंज अब यूजर्स की एसेट्स को ट्रस्ट में रखने वाले कस्टोडियन की तरह जिम्मेदार होंगे।
भारत को मौका मिला है कि वह इनोवेशन को बढ़ावा देते हुए कंज्यूमर प्रोटेक्शन और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी सुनिश्चित करे।
Bitcoin inBharat का नजरिया:
यह फैसला भारतीय क्रिप्टो इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा कदम है। लंबे समय से रेगुलेटरी अनिश्चितता थी, लेकिन अब ज्यूडिशरी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि क्रिप्टो सिर्फ डिजिटल कोड नहीं, बल्कि वैल्यूबल एसेट है। यह फैसला भारत में क्रिप्टो रेगुलेशन के लिए मजबूत बुनियाद तैयार करता है। निवेशकों को अब ज्यादा आत्मविश्वास के साथ Bitcoin, Ethereum, XRP जैसी एसेट्स को होल्ड करने की उम्मीद बढ़ गई है।
नोट: यह जजमेंट इंटरिम रिलीफ के लिए है, लेकिन इसमें दिए गए ऑब्जर्वेशन्स भविष्य के कई केसों में प्रेसिडेंट बनेंगे।
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