2025 में भारत में क्रिप्टो एसेट्स में 340 बिलियन डॉलर (करीब 32 लाख करोड़ रुपये) का इनफ्लो दर्ज किया गया, जो देश की GDP का लगभग 9% है। OECD रिपोर्ट के अनुसार भारत एशिया में सबसे आगे, जानें पूरी डिटेल।
भारत में 2025 में क्रिप्टो इनफ्लो ने रचा इतिहास: 340 बिलियन डॉलर पहुंचा, GDP का 9% के बराबर – OECD रिपोर्ट
नई दिल्ली। भारत क्रिप्टोकरेंसी के वैश्विक हब के रूप में उभर रहा है। OECD की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जून 2024 से जून 2025 के बीच भारत में क्रिप्टो एसेट्स (स्टेबलकॉइन्स सहित) में लगभग 340 बिलियन डॉलर (करीब ₹32 लाख करोड़) का इनफ्लो दर्ज किया गया। यह राशि भारत की GDP का लगभग 9 प्रतिशत के बराबर है।यह आंकड़ा भारत को एशिया के प्रमुख देशों में क्रिप्टो इनफ्लो के मामले में सबसे ऊपर रखता है। दूसरे नंबर पर दक्षिण कोरिया रहा। रिपोर्ट में Chainalysis के डेटा का हवाला दिया गया है।
एशिया में भारत का दबदबा
OECD की Asia Capital Markets Report 2026 के मुताबिक, भारत ने एशिया के अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा क्रिप्टो इनफ्लो आकर्षित किया। हालांकि GDP के प्रतिशत के रूप में वियतनाम सबसे आगे रहा (लगभग 50%), उसके बाद कंबोडिया (28%) और पाकिस्तान (26%)। भारत का 9% का आंकड़ा भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि क्रिप्टो ट्रांजेक्शन्स भारतीय यूजर्स से जुड़ी गतिविधियों को दर्शाते हैं, जिसमें डोमेस्टिक ट्रेडिंग, वॉलेट ट्रांसफर, DeFi एक्टिविटी और पेमेंट्स शामिल हो सकते हैं। यह जरूरी नहीं कि सारा पैसा विदेश से आया हो या बाहर गया हो।
भारत में क्रिप्टो की मौजूदा स्थिति
भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) पर 30% टैक्स प्लस सरचार्ज और 1% TDS लागू है। इसके बावजूद क्रिप्टो की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। Chainalysis की Global Crypto Adoption Index 2025 में भारत नंबर 1 स्थान पर है, जो रिटेल यूजर्स की सक्रियता को दर्शाता है।
वर्तमान में सरकार क्रिप्टो रेगुलेशन पर काम कर रही है। संसदीय वित्त समिति 2 जुलाई 2026 को RBI अधिकारियों के साथ बैठक करने वाली है, जिसमें क्रिप्टो फ्रेमवर्क पर चर्चा होगी।
विशेषज्ञों की राय
Digital South Trust के फाउंडर सुधाकर लक्ष्मणराजा के अनुसार, इतनी बड़ी क्रिप्टो इकोनॉमी (9% GDP) को अनरेगुलेटेड नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने निवेशक सुरक्षा, टैक्सेशन, LRS, FEMA, एक्सचेंज जवाबदेही, कस्टडी, स्टेबलकॉइन्स और DeFi जैसे मुद्दों पर व्यापक रेगुलेशन की जरूरत पर जोर दिया।
OECD रिपोर्ट में स्टेबलकॉइन्स की बढ़ती भूमिका का भी जिक्र है। मार्च 2026 तक टॉप 5 स्टेबलकॉइन्स की मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 300 बिलियन डॉलर पहुंच गई थी।
BitcoinInBharat का नजरिया
यह रिपोर्ट भारत में क्रिप्टो एडॉप्शन की ताकत को साबित करती है। 30% टैक्स और रेगुलेटरी अनिश्चितता के बावजूद भारतीय यूजर्स क्रिप्टो में सक्रिय हैं। सही रेगुलेशन, निवेशक सुरक्षा और इनोवेशन को बढ़ावा देने से भारत न सिर्फ एशिया बल्कि ग्लोबल क्रिप्टो इकोनॉमी का लीडर बन सकता है।
Bitcoin और क्रिप्टो में निवेश करने से पहले DYOR (Do Your Own Research) करें और केवल उतना निवेश करें जितना आप खोने का जोखिम उठा सकें।






