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भारत में क्रिप्टोकरेंसी (Virtual Digital Assets या VDA) पर अभी भी स्पष्ट और व्यापक नियम-कानून नहीं बने हैं। सरकार ने 2022 से फ्लैट 30% टैक्स और 1% TDS लागू कर रखा है, जो 2026 में भी जारी है। नए रिपोर्टिंग नियमों के साथ टैक्स कम्प्लायंस सख्त हो गया है, लेकिन क्रिप्टो को लीगल टेंडर का दर्जा नहीं मिला है और पूरा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क अभी भी अधूरा है।
इसी बीच जापान बनाम भारत के ऐतिहासिक T20I मैच (जो भारत-जापान राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने पर खेला गया) में Delta Exchange का बड़ा विज्ञापन बोर्ड साफ दिख रहा था। बोर्ड पर लिखा था – “Trade Crypto in INR”। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब भारत में क्रिप्टो के लिए उचित नियम नहीं हैं, तो BCCI या संबंधित आयोजन में क्रिप्टो एक्सचेंज का प्रचार क्यों हो रहा है?
Delta Exchange क्या है?
Delta Exchange एक क्रिप्टो डेरिवेटिव्स प्लेटफॉर्म है जो भारतीय यूजर्स के लिए INR में डिपॉजिट-विथड्रॉल और सेटलमेंट की सुविधा देता है। यह FIU-IND के साथ रजिस्टर्ड है और भारतीय नियमों के मुताबिक काम करने का दावा करता है। हाल ही में इसने भारत-अफगानिस्तान T20I सीरीज में भी ग्लोबल स्पॉन्सर के रूप में हिस्सा लिया था और खुद को भारत में ऑन-ग्राउंड क्रिकेट विज्ञापन लेने वाला पहला क्रिप्टो ब्रांड बताया था।
BCCI ने 2025 में टीम इंडिया के लीड स्पॉन्सरशिप से क्रिप्टो और रियल-मनी गेमिंग कंपनियों को बाहर रखा था। फिर भी मैच के मैदान पर (जो जापान में हुआ) Delta Exchange का विज्ञापन दिखना कई क्रिकेट और क्रिप्टो फैंस के लिए विरोधाभासी लगा। कुछ लोगों का कहना है कि मैच जापान में था और स्थानीय/अंतरराष्ट्रीय स्पॉन्सरशिप का मामला हो सकता है, BCCI सीधे प्रमोट नहीं कर रहा। फिर भी भारतीय दर्शकों तक यह संदेश पहुंच रहा है।
भारत में क्रिप्टो की मौजूदा स्थिति
टैक्स**: ट्रांसफर पर 30% फ्लैट टैक्स (सरचार्ज और सेस अलग), नुकसान सेट-ऑफ नहीं, 1% TDS।
रेगुलेशन**: कोई पूर्ण कानूनी ढांचा नहीं। कुछ प्लेटफॉर्म FIU रजिस्ट्रेशन के साथ काम कर रहे हैं, लेकिन RBI और सरकार की तरफ से अभी भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
प्रभाव**: उच्च टैक्स और अनिश्चितता की वजह से कई ट्रेडर्स और निवेशक प्रभावित हैं। साथ ही क्रिकेट जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर क्रिप्टो ब्रांडिंग से जागरूकता बढ़ रही है।
यह घटना क्रिप्टो इंडस्ट्री और खेल प्रायोजन के बीच के जटिल रिश्ते को उजागर करती है। एक तरफ सरकार टैक्स वसूल रही है और रिपोर्टिंग सख्त कर रही है, दूसरी तरफ बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स में क्रिप्टो ब्रांड अपनी जगह बना रहे हैं।
Bitcoin in Bharat के पाठकों के लिए यह चर्चा महत्वपूर्ण है। क्या आपको लगता है कि भारत में जल्द ही क्रिप्टो के लिए स्पष्ट नियम आने चाहिए ताकि ऐसे विरोधाभास खत्म हों? या स्पॉन्सरशिप को सिर्फ व्यावसायिक नजरिए से देखना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
(नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। क्रिप्टो निवेश जोखिम भरा है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।)








