भारतीय क्रिप्टो इंडस्ट्री में एक बार फिर रेगुलेटरी नजर सख्त होती नजर आ रही है। फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU-IND) ने बड़े ओवर-द-काउंटर (OTC) क्रिप्टो डील्स को अपने स्कैनर में ले लिया है। सूत्रों के मुताबिक, FIU ने कम से कम तीन प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंजेस को $10,000 (लगभग ₹8.5 लाख) से ज्यादा के OTC ट्रांजेक्शन का पूरा डेटा शेयर करने के लिए कहा है।यह कदम मनी लॉन्ड्रिंग और अनट्रेस्ड फंड्स को ट्रैक करने के उद्देश्य से उठाया गया है, खासकर उन क्लोजली-हेल्ड कंपनियों और हाई-नेटवर्थ क्लाइंट्स की डील्स पर जहां बेनिफिशियल ओनर (असली मालिक) की पहचान करना मुश्किल होता है।
OTC डील्स क्यों आ रहे हैं फोकस में?
OTC ट्रेड्स सामान्य एक्सचेंज ट्रेडिंग से अलग होते हैं। इनमें:प्लेटफॉर्म खुद ऑर्डर अपने किताबों पर लेता है
अपनी फंडिंग से क्रिप्टो खरीदता है
फिर काउंटर-पार्टी ढूंढता है
इससे बड़े अमाउंट की ट्रेडिंग बिना मार्केट प्राइस में उतार-चढ़ाव के हो जाती है। खासकर बड़े क्लाइंट्स को प्राइवेट वॉलेट में क्रिप्टो विड्रॉ करने की आसानी भी मिलती है।
एक इंडस्ट्री सोर्स के अनुसार, “OTC के जरिए खरीदने वाले क्लाइंट्स प्राइवेट वॉलेट में विड्रॉ करने पर जोर देते हैं।” एक बार वॉलेट में ट्रांसफर होने के बाद एसेट्स को दुनिया में कहीं भी भेजा जा सकता है, जो रेगुलेटर्स के लिए चिंता का विषय है।
FIU का एक्शन: क्या मांगा गया है?
मई के अंत में हुई मीटिंग के बाद प्रमुख एक्सचेंजेस को अलग-अलग निर्देश दिए गए।
$10,000 से ऊपर के सभी OTC ट्रेड्स का डेटा शेयर करना।
जनवरी 2026 से अब तक के OTC रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने के निर्देश।
संदिग्ध ट्रांजेक्शन रिपोर्ट्स (STRs) के अलावा अतिरिक्त जानकारी।
FIU-IND वित्त मंत्रालय के अधीन काम करता है और इसका मुख्य काम मनी लॉन्ड्रिंग तथा टेरर फाइनेंसिंग को रोकना है।KYC और AML की चुनौतियांOTC डील्स ज्यादातर प्राइवेट कंपनियों के जरिए होती हैं। यहां KYC (Know Your Customer) करना रिटेल इन्वेस्टर्स की तुलना में ज्यादा जटिल होता है। डायरेक्टर्स और अल्टीमेट बेनिफिशियल ओनर्स (UBOs) की सही पहचान में दिक्कतें आती हैं। कभी-कभी फेक आईडी का इस्तेमाल भी देखा गया है।एक्सचेंजेस एन्हांस्ड ड्यू डिलिजेंस करते हैं, लेकिन विड्रॉ के बाद एसेट्स पर उनका कोई कंट्रोल नहीं रहता।
भारतीय क्रिप्टो इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा?
यह खबर क्रिप्टो मार्केट के लिए मिश्रित संकेत है:
पॉजिटिव: पारदर्शिता बढ़ेगी, लॉन्ग टर्म में इंडस्ट्री की क्रेडिबिलिटी मजबूत होगी।
चुनौती: बड़े इंस्टीट्यूशनल और HNI क्लाइंट्स के लिए प्रोसेस और सख्त हो सकता है।
रिटेल इन्वेस्टर्स पर सीधा असर कम होने की उम्मीद है, लेकिन ओवरऑल कंप्लायंस की जरूरत बढ़ जाएगी।
भारत में क्रिप्टो पर 30% टैक्स और 1% TDS पहले से लागू है। FIU-IND के साथ रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। यह नया कदम रेगुलेटेड फ्रेमवर्क को और मजबूत करने की दिशा में माना जा रहा है।
निष्कर्ष और सलाह:
क्रिप्टो इन्वेस्टर्स को सलाह है कि हमेशा FIU-रजिस्टर्ड और कंप्लायंट प्लेटफॉर्म्स का ही इस्तेमाल करें। KYC प्रोसेस को पूरा रखें और बड़े ट्रांजेक्शंस में स्रोत का साफ रिकॉर्ड रखें।भारत क्रिप्टो को पूरी तरह बैन नहीं करना चाहता, बल्कि इसे रेगुलेट करके मुख्यधारा में लाना चाहता है। FIU का यह कदम उसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण स्टेप है।BitcoinInBharat पर हम लगातार भारत में क्रिप्टो रेगुलेशन, टैक्स और मार्केट अपडेट्स पर नजर रखते हैं। इस खबर पर कोई अपडेट आए तो हम तुरंत शेयर करेंगे।
आपकी राय क्या है? कमेंट में बताएं – क्या OTC पर ज्यादा रेगुलेशन क्रिप्टो को मजबूत बनाएगा या चुनौतियां बढ़ाएगा?
नोट: यह लेख Economic Times रिपोर्ट पर आधारित है।






