फेडेरल बैंक ऑफ इंडिया और रिपल (Ripple) की पार्टनरशिप फिर से चर्चा में है। सोशल मीडिया पर, खासकर X (ट्विटर) पर एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि फेडेरल बैंक $XRP का इस्तेमाल करके $5,000,000,000,000 (5 ट्रिलियन डॉलर) से ज्यादा इंस्टीट्यूशनल कैपिटल अनलॉक करने वाला है।
यह दावा कितना सही है? Bitcoin in Bharat पर हम तथ्यों के आधार पर पूरी कहानी समझाते हैं।
2019 की असली पार्टनरशिप क्या थी?
मार्च 2019 में फेडेरल बैंक लिमिटेड (केरल मुख्यालय वाला प्राइवेट सेक्टर बैंक) ने आधिकारिक तौर पर रिपल इंक के साथ पार्टनरशिप की घोषणा की थी। बैंक ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और BSE को फाइलिंग भेजी थी।
उसमें साफ लिखा था कि फेडेरल बैंक रिपल के नेटवर्क के जरिए क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस (विदेश से भारत में पैसे भेजने) को तेज और सुरक्षित बनाएगा। ब्लॉकचेन-आधारित सॉल्यूशन से ट्रांजेक्शन ज्यादा सुरक्षित होंगे। उस समय MD & CEO श्याम श्रीनिवासन और रिपल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जॉन मिशेल ने समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
यह पार्टनरशिप मुख्य रूप से RippleNet (रिपल का मैसेजिंग और पेमेंट नेटवर्क) के लिए थी। इसमें XRP टोकन का जिक्र नहीं था। कई बैंक RippleNet का इस्तेमाल सिर्फ तेज सेटलमेंट के लिए करते हैं, बिना XRP के।
बाद में UAE की लुलू एक्सचेंज के साथ भी इसी नेटवर्क पर भारत के लिए रेमिटेंस कोर्रिडोर बेहतर बनाने की खबर आई थी।
$5 ट्रिलियन का दावा कहां से आया?
हालिया वायरल पोस्ट में 2019 के उसी पुराने दस्तावेज को दिखाकर दावा किया जा रहा है कि फेडेरल बैंक अब XRP इस्तेमाल करके 5 ट्रिलियन डॉलर का इंस्टीट्यूशनल कैपिटल अनलॉक करेगा।
यह दावा असत्य और बिना सबूत का है।
हाल के विश्लेषणों में भी साफ कहा गया है कि पुरानी पार्टनरशिप रिमिटेंस तक सीमित थी और वर्तमान CBDC पायलट या किसी बड़े इंस्टीट्यूशनल मूव से इसका कोई कनेक्शन नहीं दिखाया गया है।
भारत में क्रिप्टो और बैंकिंग की हकीकत
भारत दुनिया के सबसे बड़े रेमिटेंस मार्केट में से एक है। NRI हर साल अरबों डॉलर भेजते हैं। ब्लॉकचेन और फास्ट पेमेंट टेक्नोलॉजी से लागत घट सकती है और स्पीड बढ़ सकती है।
Bitcoin in Bharat का नजरिया
सोशल मीडिया पर हाइप बहुत तेजी से फैलता है। पुराने दस्तावेज को नए दावों से जोड़कर फोमो (Fear of Missing Out) पैदा करना आम बात हो गई है।
फेडेरल बैंक-रिपल की 2019 वाली पार्टनरशिप रियल थी और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स में सुधार लाने का प्रयास था। लेकिन “XRP से 5 ट्रिलियन अनलॉक” वाला दावा पूरी तरह गलत है।
क्रिप्टो इनवेस्टर्स को हमेशा आधिकारिक स्रोतों (RBI, बैंक की फाइलिंग्स, कंपनी के प्रेस रिलीज) पर भरोसा करना चाहिए। अफवाहों पर फैसला न लें।
भारत में बिटकॉइन और क्रिप्टो इकोसिस्टम धीरे-धीरे बढ़ रहा है। रेगुलेशन साफ होने के साथ असली यूज-केस सामने आएंगे। तब तक तथ्यों पर टिके रहें।
क्या आप इस पार्टनरशिप के बारे में और जानना चाहते हैं? कमेंट में बताएं या हमारे दूसरे आर्टिकल्स पढ़ें।


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