गुरुवार, 27 अगस्त 2026

Bitcoin और Gold ETF में रिकॉर्ड $7 बिलियन का निवेश: स्कार्सिटी ट्रेड की वापसी और भारतीय निवेशकों के लिए सबक | BitcoininBharat

निवेशक अब सोना और बिटकॉइन में से किसी एक को चुनने की बजाय दोनों खरीद रहे हैं। वित्तीय चिंताओं (fiscal anxiety) के खिलाफ हेज के रूप में ये दोनों एसेट्स एक साथ मांग में आ गए हैं।

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच ट्रेडिंग दिनों में गोल्ड और बिटकॉइन ट्रैकिंग एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में कुल रिकॉर्ड $7 बिलियन का निवेश आया है। यह आंकड़ा कुछ बड़े गोल्ड और बिटकॉइन ETF को अमेरिकी स्टॉक मार्केट के दिग्गज फंड्स के साथ टॉप ETF फ्लो रैंकिंग में ला खड़ा करता है।

मुख्य आंकड़े

  • SPDR Gold Shares (GLD) में लगभग $3.4 बिलियन का इनफ्लो।
  • BlackRock का iShares Bitcoin Trust (IBIT) में $1.5 बिलियन का इनफ्लो।
  • दोनों फंड्स सप्ताह की टॉप 10 अमेरिकी ETF इनफ्लो लिस्ट में शामिल रहे।

इस तेज खरीदारी का मुख्य कारण अमेरिकी राजकोषीय चिंताएं बताई जा रही हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) द्वारा लंबी अवधि के ट्रेजरी बॉन्ड्स की खरीद (buybacks) को कम से कम दोगुना करने की योजना की घोषणा के बाद यील्ड्स और डॉलर में गिरावट आई, जबकि सोना और बिटकॉइन दोनों में तेजी देखी गई।

बाजार में इसे “स्कार्सिटी ट्रेड” या “डिबेसमेंट ट्रेड” कहा जा रहा है। जब सरकारें कर्ज बढ़ाती हैं और मुद्रा की आपूर्ति बढ़ा सकती हैं, तब सीमित आपूर्ति वाले एसेट्स (जिनकी सप्लाई बढ़ाई नहीं जा सकती) की मांग बढ़ जाती है। सोना और बिटकॉइन दोनों इसी श्रेणी में आते हैं।

इस महीने सोना लगभग 13% चढ़ा और $4,600 प्रति औंस के पार चला गया, जबकि बिटकॉइन $80,000 के स्तर से ऊपर रहा।

रे डेलियो जैसे दिग्गज निवेशकों ने भी पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा (कुछ सुझावों में 15% तक) सोना और बिटकॉइन में रखने की सलाह दी है, ताकि अमेरिकी कर्ज संकट जैसे जोखिमों से बचाव हो सके।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या मतलब?

भारत में भी सोना पारंपरिक रूप से हेज के रूप में लोकप्रिय रहा है। अब बिटकॉइन को भी कई निवेशक “डिजिटल गोल्ड” के रूप में देखने लगे हैं। अमेरिकी राजकोषीय नीतियों और डॉलर की चाल का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ता है, जिससे भारतीय रुपये और घरेलू एसेट्स भी प्रभावित हो सकते हैं।

  • सीमित आपूर्ति वाला बिटकॉइन लंबे समय में मुद्रास्फीति और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ हेज के रूप में काम कर सकता है।
  • गोल्ड और बिटकॉइन दोनों को पोर्टफोलियो में रखने से विविधीकरण (diversification) का फायदा मिल सकता है।
  • हालांकि, बिटकॉइन में अस्थिरता अधिक है, इसलिए जोखिम सहनशीलता के अनुसार ही निवेश करना चाहिए।

निष्कर्ष:
निवेशक अब “सोना या बिटकॉइन” की बजाय “सोना और बिटकॉइन” की रणनीति अपना रहे हैं। स्कार्सिटी ट्रेड की यह वापसी दिखाती है कि वैश्विक स्तर पर वित्तीय अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित और सीमित आपूर्ति वाले एसेट्स की मांग बढ़ रही है। भारतीय निवेशकों को भी इस ट्रेंड को ध्यान से देखने और अपने पोर्टफोलियो को संतुलित रखने की जरूरत है।

(नोट: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।)

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