शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017

भारत में बिटक्वाइन की क़ीमत इतनी ज़्यादा क्यों?

(साभार- BBC हिन्दी)
http://www.bbc.com/hindi/india-42275664
वर्चुअल मुद्रा बिटक्वाइन की क़ीमत जिस रफ़्तार से बढ़ रही है उसने दुनिया भर के बाज़ारों में बहुत से लोगों को छप्पर फ़ाड़ मुनाफ़ा दिया है तो कई को चिंता में डाल दिया है.
भारत जैसी नकदी के ज़ोर वाली अर्थव्यवस्था में बिटक्वाइन की क़ीमत बाकी देशों के मुक़ाबले ज़्यादा है. एशियाई देशों के वित्तीय नियामक इसकी वजह ढूंढ़ने में जुटे हैं.
चीन के केंद्रीय बैंक ने देश में बिटक्वाइन के लेन-देन पर रोक लगा दी है. इंडोनेशिया और बांग्लादेश ने भी भुगतान के लिए बिटक्वाइन पर रोक लगा दी है.
भारत में बिटक्वाइन को नोट की तरह क़ानूनी मुद्रा का दर्जा तो नहीं मिला है लेकिन उसके लेन-देन को लेकर कोई नियम नहीं हैं.
कोई क़ानून न होने की वजह से बिटक्वाइन बेचने वाले ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म, रिज़र्व बैंक की चिंताओं को दरकिनार करके, बेरोकटोक चल रहे हैं.
आरबीआई ने इस हफ़्ते बिटक्वाइन का इस्तेमाल करने वाले, उसे रखने वाले और बेचने वाले लोगों को तीसरी बार चेतावनी दी है. बैंक के मुताबिक़ बिटक्वाइऩ से जुड़े आर्थिक, क़ानूनी जोखिमों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को समझने की ज़रूरत है.

लेकिन क्या लोग रिज़र्व बैंक की बात सुन रहे हैं?


जानकारों की मानें तो भारत में बिटक्वाइन की क़ीमत, ज़्यादा मांग की वजह से बढ़ रही है. यहां बिटक्वाइन की क़ीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के मुक़ाबले 20 फ़ीसदी ज़्यादा है.
बिटक्वाइन का लेन-देन करने वाले 11 भारतीय प्लेटफ़ॉर्म ने बताया कि दिन के किसी भी समय तक़रीबन 30 हज़ार लोग बिटक्वाइन में सौदा कर रहे होते हैं.
कोई भी निवेशक आसानी से एक क्लिक में खाता बनाकर तय कर सकता है कि वह पूरा बिटक्वाइन खरीदना चाहता है या उसका सिर्फ़ एक हिस्सा.
यूनोक्वाइन के सहसंस्थापक सात्विक विश्वनाथन के मुताबिक़, ''पिछले साल इस समय हमारे पास एक लाख रजिस्टर्ड ग्राहक थे. अब 850,000 हो गए हैं. क़ीमत लगातार बढ़ रही है. हमारा अब तक का विश्लेषण बताता है कि बिटक्वाइन में पैसे ज़्यादातर वे लोग लगा रहे हैं जिनके पास इतना पैसा है कि वो उस पर रिस्क ले सकें.''

फ़्लिपकार्ट और अमेज़न में चलता है बिटक्वाइन

भारत के कुछ ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म ने भी अब बिटक्वाइन को डिजिटल मुद्रा के तौर पर मान्यता देनी शुरू कर दी है. फ़्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे सबसे बड़े ऑनलाइऩ खरीदारी प्लैटफ़ॉर्म ने ग्राहकों को विकल्प दे दिया है कि वे अपने बिटक्वाइन को सामान्य मुद्रा में बदलवा कर, उससे ख़रीदारी कर सकते हैं.

बिटक्वाइन क्या है?

बिटक्वाइन के बारे में दो बातें सबसे अहम हैं - एक, ये डिजिटल यानी इंटरनेट के ज़रिए इस्तेमाल होने वाली मुद्रा है और दूसरे, इसे पारंपरिक मु्द्रा के विकल्प के तौर पर देखा जाता है.
जेब में रखे नोट और सिक्कों से जुदा, बिटक्वाइन ऑनलाइन मिलता है. बिटक्वाइन को कोई सरकार या सरकारी बैंक नहीं छापते.
एक्सपीडिया और माइक्रोसॉफ़्ट जैसी कुछ बड़ी कंपनियां बिटक्वाइन में लेन-देन करती हैं. इन सब प्लैटफ़ॉर्म पर यह एक वर्चुअल टोकन की तरह काम करता है.
हालांकि बिटक्वाइन का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल निवेश के लिए किया जाता है.
लेकिन इस सबके बाद भी एक सवाल सबके ज़ेहन में है कि क्या डिजिटल कोड देने वाला एक ओपन सॉफ़्टवेयर (बिटक्वाइन) , बैंकों में पैसे रखने से ज़्यादा सुरक्षित है?
डायरो लैब्स के सहसंस्थापक विशाल गुप्ता के मुताबिक़, ''बिटक्वाइन को सुरक्षित रखने का कोई तरीक़ा नहीं है. लोग एक प्रिंट आउट ले लेते हैं और उसे लॉकर में रखते हैं. सरकार को एक अंतरराष्ट्रीय वॉलेट बनाना चाहिए जिससे पता लग सके कि कौन, कहां लेन-देन कर रहा है. अगर मेरा बिटक्वाइन चोरी हो जाए तो ऐसे अंतरराष्ट्रीय वॉलेट से कम से कम उसका पता तो लगाया जा सकता है.''

और डिजिटल मुद्राएं भी बाज़ार में

बिटक्वाइन की लोकप्रियता के बाद इथेरियम और लाइटक्वाइन जैसी दूसरी डिजिटल मुद्राओं ने भी भारतीय निवेशकों को लुभाना शुरू कर दिया है. ऐसे में ज़रूरी है कि सरकार इस मामले में अपनी नीति साफ़ कर दे.
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के मुताबिक़, ''इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव और ज़बरदस्त तरक्की देखने को मिल रही है. तकनीकी हमेशा सरकार से दो कदम आगे रहती है इसलिए ज़रूरी है कि हम समय के साथ चलें और लगाम कसने के लिए नियम बनाएं. यह ऐसा मामला है जिस पर वित्त मंत्रालय को चर्चा करनी चाहिए और बाक़ी मंत्रालयों से बात करके मामले को आगे बढ़ाना चाहिए.''
पिछले पांच साल में कई मौक़े ऐसे आए जब बिटक्वाइन एक ही दिन में बग़ैर चेतावनी के 40 से 50 प्रतिशत गिर गया. 2013 के अप्रैल में हुई गिरावट को कौन भूल सकता है जिसमें बिटक्वाइन की क़ीमत एक ही रात में 70 फ़ीसदी गिरकर 233 डॉलर से 67 डॉलर पर आ गई.
अमरीका ने हाल ही में बिटक्वाइन के लेन-देन को जारी रखने की इजाज़त दे दी है. लेकिन वॉल स्ट्रीट के बैंकों ने इस पर चिंता जताई है. वॉरेन बफ़ेट ने बिटक्वाइन को बुलबुले जैसा बताया है.

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